खामोशी

एक रोज़ वो भी आएगा जब शब्दोँ की जगह खामोशी ले लेगी,
होंठ जैसे सिल से जाएंगे पर, यक़ीनन ये आँखें सब सह लेगी।

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बारिश

हाँ इन हवाओँ के दामन में आज नमी सी है,
चारो और घना अंधेरा,ना रंग हैं ना रोशनी हैं
बनकर बारिश आज तू….आ बरस जा फिर से
कर दे जिंदा फिर से, धड़कन ये, जो रुकी सी है।

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ज़रा मुश्किल है तेरे एहसास को लफ़्ज़ों में कह पाना..

ज़रा मुश्किल है तेरे एहसास को लफ़्ज़ों में कह पाना,
जैसे राही को मिल जाये मंज़िल, बाकी तुम समझ जाना।

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