ज़रा मुश्किल है तेरे एहसास को लफ़्ज़ों में कह पाना..

ज़रा मुश्किल है तेरे एहसास को लफ़्ज़ों में कह पाना,
जैसे राही को मिल जाये मंज़िल, बाकी तुम समझ जाना।

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बरसात

देख हवा सर्द, और ठंडी रात है
मौसम का अब क्या कहूँ, क्या बात हैं
जाने क्यूँ दिल मे है बेचैनी, क्यूँ आंखों में नमी हैं
लगता है शहर में उसके, हुई बरसात है

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